प्रेम क्या है ?
एक शास्वत प्रश्न और एक यक्ष प्रश्न भी /
अनंत काल से अनेक व्यक्ति इसको अपने अपने प्रकार से पारभाशित करते आए हैं /
इस प्रश्न के उत्तर कहीं सौंदर्य मैं विमुक्त हैं तो कहीं वर्जनाओ मैं आबद्ध / कहीं पूर्ण चंद्र की चंद्रिका मे प्रभासित बन प्रांत से रहस्यमय हैं तो कहीं सूर्य के प्रकाश मैं प्रकाशित जगत से यथार्थमय / कुछ उत्तर जीवन को दिशा दिखाते हैं तो कुछ भ्रमजाल मैं उलझा देते है /
आपका इस विषय मै क्या विचार हे ?
प्रेम पर अपने विचार रखने का आपको अधिकार भी है और कर्तव्य भी /
क्या ? पहले मै अपने विचार व्यक्त करूँ /
ठीक है , मै ही पहल करता हूँ , और बिना किसी भूमिका के सीधे सीधे बताता हूँ कि मेरे विचार मै प्रेम क्या है /
सेवा का सर्वोत्कृष्ट रुप ही प्रेम है "
कैसे ?
बताता हूँ / सेवा मानव मात्र का धर्म है /
धर्म क्या है ?
वह वशिष्ठता जिसके कारण किसी की पहचान सम्भव होती है , वह उसका धर्म होता है /
कैसे ?
जैसे ऊष्मा अग्नि की पहचान है / यदि ऊष्मा ना हो तो उसको अग्नि नहीं कहा जा सकता / अत: ऊष्मा अग्नि का धर्म है / इसी प्रकार शीतलता वर्फ का धर्म है / तरलता जल का धर्म है / प्रकाश सूर्य का धर्म है / इसी प्रकार सेवा मनुष्य का धर्म है /
क्यों ?
क्योंकि प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी रुप मै सेवा ही कर रहा है / किसान खेतो मै सेवा कर रहे है / मज़दूर कारखानों मै सेवा कर रहे है / बाजारो मै व्यापारी सेवा कर रहे है / कार्यालयों मै कर्मचारी सेवा कर रहे है / यद्यपि मनुष्यों की प्रकृति एवं परिस्थितियो के अनुसार सेवा का स्वरूप और स्तर भिन्न भिन्न हो सकता है / फिर भी सब कर तो सेवा ही रहे है / पुत्र माता पिता की सेवा करता है / बहू सास ससुर की सेवा करती है / यद्यपि उनकी सेवाओं के पीछे भावना और तद्:नुसार सेवा की उत्कृष्टता मै अंतर हो सकता है / परन्तु होगी तो सेवा ही / इसी प्रकार एक माँ अपने बच्चे की सेवा करती है / उसको नहलती धुलाती है / उसको सदैव स्वच्छ और सुन्दर रखती है / उसके बिना बोले उसकी भूख और प्यास समझ जाती है , और यदि आवश्यकता पड़े तो स्वयं भूखी प्यासी रह कर उसको खिलाती पिलाती है / वह स्वयं कुछ भी करती रहे , परन्तु अपने बच्चे की सेवा मै सदैव तत्पर रहती है / उस माँ से यदि आप कहें कि आप अपने बच्चे की बहुत सेवा करती है / तो वह निश्चिंत ही यहाँ पर " सेवा " शब्द को कतई पसंद नहीं करेगी / वह कहेगी कि मैं इस प्रकार अपने बच्चे की सेवा नहीं , उसको प्यार करती हूँ /
सेवा का यह ही सर्वोत्कृष्ट रुप प्यार है /
इस प्यार मे कोई आपेक्षा नही होती
इस प्यार मे अनंत करुना निहित होती है /
इस प्यार मे निष्क्रियता नही , सक्रियता होती है /
इस प्यार को व्यक्त करने वाले शब्द ' प्यार ' अथवा ' प्रेम ' का कोई विलोम नही होता /
सच बताईये ; क्या आपने कभी किसी को इस प्रकार से प्यार किया है ?
नहीं तो करिये न /
किसको ?
अरे! यह भी मैं ही बताऊँ / चलिये मै ही बता देता हूँ , लेकिन वादा कीजिए उसको आप निश्चित रुप से प्यार करेगे और बेइंतहा प्यार करेगे /
हाँ ! आप प्यार कीजिए अपने देश को / भारतवर्ष को /
क्या कहा ? कि आप उसको तो प्यार करते ही है / सब ही कहते है कि मै अपने देश को प्यार करता हूँ / प्यार करते है तो करते क्या है ? कैसे प्यार करते है ? याद रखिए इस प्यार मे निष्क्रियता नही सक्रियता होनी चाहिए /
इस देश मै फैली गरीबी, भुखमरी, बीमारी और अशिक्षा ; पग पग पर पसरी गंदगी , दूषित होती नदिया और जल स्रोत , उजड़ता हुआ पर्यावरण ; सच मानिए यह सब आप के प्यार को तरस रहे है / एक अरब आबादी का देश इस प्रकार प्यार को तरसे ; लानत है हम पर और आप पर / कुछ करिए ............ कुछ करिए ..........
क्या करे ?
चलिए यह भी हम ही आप को बता देते है कि आप कम से कम क्या कर सकते है / अधिक से अधिक क्या करना है यह आप पर निर्भर करता है / पर जो भी करे हम को जरुर बताए क्यो की बहुत से जन ऐसे है जो इस देश को प्यार तो करना चाहते है परन्तु नही जानते कि किस प्रकार प्यार करे / वह सम्भवत: हमसे और आप से जुड़ कर इस महान देश को वास्तव मै प्यार कर सके
चलिए संकल्प कीजिए कि कम से कम निम्न तीन साधारण सी बातो का अवश्य पालन करेगे /
1 सड़क पर पैदल अथवा किसी भी वाहन से चलते हुए यदि थूकने की आवश्यकता पड़े तो रुकिये और नाली के पास जा कर उसमें थूके / क्योंकि जिसको आप प्यार करते है उसको गंदा नही कर सकते /
2 आप अपने घर का कूड़ा रात मै अथवा सफाई कर्मचारी के आने के पूर्व ही फेका करे / यदि संभव हो तो कूड़े का वर्गीकरण कर उसका निस्तारण करे / आपके घर के आस पास की सड़के और गलिया साफ और सुन्दर रहेगी तो पता चलेगा कि इस बस्ती अथवा मोहल्ले मै सभ्य और सुसंस्कृत लोग रहते है /
3 कभी भी ऐसे आंदोलन का हिस्सा न बने जिसमे सार्वजनिक सम्पत्ती को नुकसान पहुचाया जाए / क्यो की आप जिसको प्यार करते है , उसको कभी नुकसान नही पहुचा सकते है /
मित्रो , हो सकता है आप पढ़ रहे हो अथवा पढ़ चुके हो / आप कुछ कर रहे हो अथवा कुछ करने की योजना बना रहे हो / भविष्य मै आप सम्भवत्: नौकरी करे अथवा व्यपार / हो सकता है आप कोई कारखाना अथवा प्रतिष्ठान स्थापित करे / सबके लिये मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएँ / ईश्वर आपको अपार सफलताएँ प्रदान करे / आप जो भी करे , अपने इस देश का ध्यान सदैव रखे कि इस देश को , आपको , हमको और सबको मिल कर सुन्दर और सशक्त बनना है /
आप भी तो इस महान देश को प्यार करते है न !!
लोड हो रहा है...• प्रेम की पाठशाला
श्रेणियाँ: Blog
प्रेम की पाठशाला 3.34/3
2008